​ एक प्रेम कहानी

                एक प्रेम कहानी


मै अपने ऑफिस के केबिन में  एक ग्राहक से फ़ोन पर बात कर रहा था तभी मेरे केबिन का दरवाजा खुला और सामने मेरी सह-कर्मी कोमल थी  अपनी प्यारी सी मुस्कान के साथ वो धीरे से अंदर आने को पूछती है और मैंने भी हाथ के इशारे से अन्दर आने का इशारा किया और वो अंदर आ के मेरे सामने खड़ी हो गयी मैंने उसे बैठने का इशारा किया और मै अपनी बात खत्म करके कोमल से पूछता हूँ बताई ये ग़रीब आज आप की क्या सेवा कर सकता है मैंने माजकिये अंदाज में कहा। वैसे उसे देख के लोगो के होश उड़ जाते है क्योंकि वो है ही इतनी सुन्दर और प्यारी। अगर कोई उसकी आवाज़ सुन ले तो दीवाना सा हो जाये उसकी आवाज में एक जादू सा था। लेकिन मुझे उसकी मुस्कान बहुत पसंद हैं।


वो इससे पहले कुछ बोलती मैंने फ़ोन उठा के दो कॉफ़ी लाने को बोल दिया इसपर वो मुस्कुरा के बोली मै यहाँ कॉफी पीने नही आयी मुझे तुम से कुछ कहना है मैंने कहा हाँ हाँ बोल देना जो कहने आयी कॉफी पीते-पीते, अब आयी हो पी के ही जाना। वैसे कोमल प्रबंधन में काम करती है और मै मार्केटिंग में। फिर मैंने उससे पूछा बोलो क्या कहने आयी हो मैंने थोड़ा माजकिये अंदाज में फिर से कहा।


वो थोड़ा घबड़ा रही थी उसकी चेहरे से  साफ साफ पता चल रहा था। मैंने घबराते हुए उससे पूछा सब ठीक तो है ना कोई परेशानी तो नही है पर वो फिर भी कुछ नही बोली और अपना सर नीचे कर के अपने दाहिने हाथ की अंगूठी को बार बार निकाल रही थी फिर से पहन रही थी। मैं ये सब देख रहा था और थोड़ा हैरान भी जहाँ तक मैं कोमल को जानता हूँ वो घबराने वाली लड़कियों में से नही थी। वैसे मैं उसे पिछले दो सालों से जानता हूँ और वो मेरी काफी अच्छी दोस्त भी हैं वो मुझसे सभी बाते बताती हैं वो मुझसे कभी कुछ नही छिपाती चाहे कैसी भी परेशानी हो वो सबसे पहले मुझे ही बताती थी। मैंने कोमल को फिर से पूछा बताओ क्या बात है फिर उसने अपना सर ऊपर किया और वही प्यारी सी मुस्कान दी जिसका मैं दीवना हूँ उसकी मुस्कान देख के चाहे मेरा मूड कैसा भी वो सही हो जाता हैं इतनी प्यारी मुस्कान है उसकी,उसकी मुस्कान में एक भोलापन है।
उसकी मुस्कान से मुझे पता चल गया कि कोई चिंता की बात नही हैं पर वो कुछ बोल क्यों नही यही मेरी समझ में नही आता वैसे तो वो बहुत बोलती है पता नही आज क्यों मौन व्रत धारण किये हुई हैं जिससे मेरी जानने की जिज्ञासा और ज्यादा बढ़ गयी है। मैं भी उसे बार बार बोले जा रहा हूँ बोलने को इतने में कॉफ़ी आ गयी मैंने उसे कॉफी पीने को कहा और हम दोनों कॉफ़ी पिने लगे ,मैंने फिर कोशिश की और कहा अब तो बता दो क्या बात है जिसके लिए इतना इंतजार करा रही हो। लेकिन फिर भी वो चुपचाप कॉफी पिए जा रही थी और कप को टेबल पर रख के एक गहरी सांस लेती है और अचानक एक झटके में बोल पड़ती हैं “I Love You”। और फिर वो चुप हो जाती है अब उसकी आँखों में एक सकून दिख रहा था पर उसका गला सुख रहा था मैंने पानी का गिलास उसकी तरफ कर के बोल पी लो पानी थोड़ा आराम लगेगा। जब उसने ई लव यू कहा तो मुझे एक झटका सा लगा की ये आखिर कब और कैसे हुआ मैं भी यही सोच रहा था।
मैंने उसे समझाने वाले अंदाज में बोला कोमल ये सब क्या हैं तुम ने तो आज मुझे झटका दे दिया आज अच्छा किया कि अपने दिल की बात बता दी अब तुम्हे कैसा लग रहा है वो फटाक से बोल पड़ी अब दिल दिमाग सब हल्का लग रहा है बहुत बोझ सा लग रहा था । तुमने अपने दिल की बात बता दी मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है और मुझसे कही ये उससे भी ख़ुशी की बात हैं ये सुन के उसे बहुत संतोष महसूस हुआ। तुम बहुत अच्छी और प्यारी हो “लेकिन” सुनते ही उसके आखो में एक चमक और थोड़ा डर भी दिखने लगा वो बहुत ही ज्यादा उत्सुख हो रही थी। लेकिन तुम्हे एक बात मेरे बारे में शायद पता नही मै किसी और से प्यार करता हूँ, ये सुनते ही वो उदास हो गयी उसकी आँखों में थोड़ा सा पानी भी आ गया था पर वो उसे छुपाने के बोल पड़ी अब मै चलती हूँ मुझे बॉस बुला रहे है शायद और वो वहाँ से बहाना बना के चली गयी और बहार जा के अपने आंसुओ को पूछते हुए अपने केबिन की ओर चली गयी।


कुछ ही देर तक मै सोचता रहा इतने मेरी नजर घड़ी पर गयी लंच का समय हो गया था मैंने सोचा आज लंच नही करूँगा फिर दिल में क्या आया मैंने अपना डब्बा उठाया और कैंटीन की और चल पड़ा। रास्ते में मुझे रोहन मिला और हम दोनों में कैंटीन की ओर चल पड़े।कैंटीन पहुँच के मेरी आँखें कोमल को ही खोज रही थी मैंने देखा की आज वो कोने में जा के कोल्ड ड्रिंक पी रही थी और गहरी सोच में पड़ी हुई थी। उसके टेबल के पास जा के उससे पूछ्ता हूँ क्या मैं यहाँ तुम्हे जॉइन कर सकता हूँ पर ऐसा लगा हो उसने मेरी बात ही नही सुनी फिर मैंने उससे पूछा मै तुम्हे ज्वाइन कर सकता हूँ ये सुन के वो सकपका गयी और वो बोली तुम ऐसा लग रहा था जैसे मैंने उसे नींद से जगा दिया हो।मैंने उससे पूछा कहाँ खोयी थी वो बोली कही नही मै तो यही हूँ।फ़िर मैंने उससे कहा आज कुछ खा नही रही हो। वो थोड़ा दुखी हो के बोली आज खाना खाने का मूड नही है इसपर मैं भी बोल पड़ा आज मेरा भी मूड नही है पर बेचारे इस डिब्बे का क्या दोष है बताओ आज ऐसे ही पड़ा रहेगा और खाना बेकार हो जायेगा। मैंने कहा कोमल आज ऐसा करते है तुम्हारा भी मूड नही और मेरा भी मूड नही क्यों ना आज इस डिब्बे को दोनों बिना मूड के खा लेते है ये बोलते हुए मैंने डिब्बा खोल के मैंने कोमल की ओर बढ़ा दिया पर उसने मना कर दिया फिर मैंने उससे कहा प्लीज मेरे लिए थोड़ा सा तब जब के वो खाना खाने को तैयार हो गयी।


हमने खाना खाना शुरू कर दिया खाते हुए मैंने उससे कहा i am sorry कोमल मुझे ये बात तुम्हे पहले ही बता देना चाहिए था। कम से कम तुम्हारे दिल को आज तकलीफ़ ना होती,उसने कहा कोई बात नही मुझे ये बात पहले पूछ लेनी चाहिए थी वैसे कौन है वो खुशनशीब लड़की जिसको तुमने अपना दिल दिया है कौन है मेरी सौतन उसने माजकिये अंदाज में कहा। “नेहा” नाम है उसका वो बोल पड़ी चलो आज तुम्हारी Love story सुनते है चलो बताओ शुरू से, शुरू हो जाओ फिर मैंने उसे बताना शुरु किया अपनी कहानी मेरी उससे पहली मुलाकात उस समय हुई जब मैं अपने ऑफिस से मीटिंग के लिए जा रहा था तभी लिफ्ट के पास एक लड़की ने मेरे कम्पनी का रास्ता पूछा और मैंने उसे एक मंजिल और ऊपर भेज दिया।कुछ दिनो के बाद पता चला की वो उसी कम्पनी में जॉब के लिए आई हुई थी मैं उसे देखकर थोड़ा डर गया ।


फिर मैंने उसके बारे में पता किया और उसके पास गया और उससे कहा sorry जी मै थोड़ा उस दिन आप से मजाक कर रहा था फिर हम दोनों में बातचीत शुरू हो गयी। हम रोज साथ में खाना खाते ।कुछ दिनों के बाद हम साथ में आने जाने लगे ,धीरे धीरे हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती भी हो चुकी थी और ये दोस्ती कब प्यार में बदल गया हमे पता भी नही चला । मैंने एक दिन हिम्मत करके उससे पूछ ही लिया की वो मुझे प्यार करती है या नही ये कह के सारा मजा ख़राब कर दिया की आज यही बात वो भी मुझसे पूछने वाली थी ,पर मै बहुत खुश था । उसने घुमा कर ही हाँ बोल दिया था मैं खुशी के मारे उछल पड़ा मेरी ख़ुशी का कोई ठीकाना नही था क्योंकि ये मेरा पहला प्यार था। उसके बाद हम दोनों साथ में बहुत सारा वक़्त साथ में बिताते कभी फिल्म के लिए तो कभी बाहर खाना खाने के बहाने साथ में घूमते रहते।हमारा प्यार और भी गहरा होता चला । हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया ये बात हम अपने घर वालो को बताने की सोची की किसी दिन दोनों अपने घर वालो को अपने रिश्ते के बारे में बता देंगे।
अचानक उसने ऑफिस आना बंद कर दिया मुझे लगा उसने नौकरी छोड़ दी पर ऐसा ना था उसका नंबर भी बंद आ रहा था मुझे बहुत टेंशन हो रही थी की बात क्या है , शाम को मै उसके घर जाने की सोची फिर मैंने ये आईडिया छोड़ दिया सोचा आज नही अगर वो कल नही आयी तो पक्का कल उसके घर चला जाऊँगा। अगले दिन वो फिर नही आयी मुझे और ज्यादा टेंशन हो गयी आज का दिन ही नही कट रहा था ऑफिस में ऐसा लग रहा था अभी छुट्टी हो और उड़ के उसके घर चला जाऊ। शाम को छुट्टी होते ही बिना रुके मै सीधा उसके घर को चला गया उसके घर पहुँच कर देखा तो घर में ताला लगा था पड़ोसी से पता किया तो पता चला की वो शहर छोड़ के चले गए। मेरा दिल एक झटके में टूट कर बिखर गया मेरे पैरों तले से जमीन ही मानो खिसक गयी हो मुझे बिलकुल भी होश ना रहा मैं पागलो की तरह सड़को पर चले जा रहा था । मैं चलते समय यही सोच रहा था कि मुझे बिना बताये वो चली गयी ना ही कोई फ़ोन ना ही कोई मैसेज ऐसा कैसे हो सकता है इतने में मै किसी चीज से टकरा गया जब आँखें खुली तो पता चला मै हॉस्पिटल में हूँ और मेरा एक्सीडेंट हो गया हैं मुझे ज्यादा शरीर पर तो चोट नही आयी थी पर जो चोट दिल पे लगी थी उसका दर्द नही सहा जा रहा था। मैं पागल हो होने लगा हर पल उसकी याद आती है मेरा प्यार मुझसे जुदा हो गया मेरे सारे अरमान टूट गए सपने बिखर गए थे ।


मुझे किसी बात का होश तक नही रहा 6 महीने तक मैं पागलखाने में रहा उसके बाद कुछ ठीक हुआ तो घर वालो ने घर लाया लेकिन उसकी याद आज भी आती है और आज भी मैं उसे उतना ही प्यार करता हूँ। अभी कुछ दिनों पहले ही उसकी एक रिश्तेदार मिले तो पता चला की उसकी शादी हो चुकी है। जब वो शहर छोड़ के गयी उसके 2 महीने बाद ही ये जान कर मुझे और भी ज्यादा दुखी हो गया। 

लेकिन ये बाद सुनते ही कोमल बहुत खुश हो रही थी क्योंकि उसका रास्ता साफ दिख रहा था उसने ख़ुशी के मारे मुझे गले से लगा लिया और बोलने लगी i love you लेकिन तुम्हारे पहले प्यार के लिए मुझे बहुत दुःख है। मुझे ये नही समझ में आ रहा था कि कोमल खुश है या दुःखी क्योंकि मैंने उसे अभी तक हाँ नही कहा था पर उसकी खुशी देख के मै अपने सारे गमो को भूल बैठा।
मुझे इस बात की ख़ुशी थी की आज मेरी वजह से किसी को ख़ुशी मिली थी।

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ये कैसा प्यार

​जुदाई का ग़म उन्हें ही होता है, जिनको किसी के जाने का ग़म होता है| कहने का भाव जुदाई का गम उन्हें सबसे ज्यादा होता जिसका अपना कोई जिसे वो जी जान से प्यार करता है वो बिछड़ जाता है| ऐसा भी देखने को मिला है की जिनकी याद में, जुदाई के ग़म में हम अपनी ज़िंदगी व्यतीत कर रहे है उनको तो हमारी चिंता भी नहीं होती और वो कभी मुड़ के भी हमारी तरफ़ नहीं देखते| ऐसे प्यार करने को एक तरफ़ा प्यार कहते हैं|

 मैंने भी अपनी ज़िंंदगी में ऐसे प्यार करने वालो को देखा है| उनमें से एक है पंकज जो की एक लड़की से बहुत प्यार करता था जिसका नाम था सपना|  पंकज बचपन से ही उसको पसंद करता था| पंकज जिस रास्ते से अपने एक दोस्त अंकित के साथ स्कूल जाता था सपना का घर रास्ते में पड़ता था| वो रोज उसको जाते वक़्त देखता था | ऐसा करते करते उसको उस लड़की से प्यार हो गया जिसको सिर्फ़ वो दूर से देखता था| यह जाने बिना कि वो लड़की भी उसे चाहती है या नहीं| अब कई साल बीत चुके थे| एक दिन पंकज रोज़ की तरह स्कूल जा रहा था उसके मन में सपना को देखने की चाह वैसे ही बरकरार थी जैसे पिछले कई सालो से चल रहा था फिर अचानक जब वो सपना के घर के पास पहुँचता है तो क्या देखता है की इस बार वो दिखाई नहीं देती और उसके घर को ताला लगा हुआ था| पंकज अब हक्का-बक्का रह गया कि घर पर ताला क्यों लगा हुआ है| अब वो सपना को कैसे देखेगा वो आस पास से पूछता है और उससे पता चलता है कि वो यहाँ से घर छोड़ कर चले गए हैं और किसी को बता कर नहीं गए कि कहा जा रहे हैं| इस तरह पंकज का सपना जो सपना के साथ जिंदगी बिताने का था वो टूट जाता है|

 अब पंकज सपना की याद में स्कूल तो जाता है पर रास्ते में कभी भी फिर उसको सपना दिखाई नहीं देती| अब वो सपना की याद में अपनी पूरी ज़िंदगी बिताएगा ऐसा वो प्रण ले लेता है| अब पंकज पहले की तरह ख़ुश नहीं रहता था सपना के गम में हमेशा उदास रहता था जैसे की ज़िंदगी का अब कोई मकसद ही न रह गया हो | पंकज ने अपनी जिंदगी को जीना छोड़ दिया था| पंकज के दोस्त अंकित को सब कुछ पता था कि पंकज क्यों उदास है और अगर पंकज ज्यादा दिन ऐसे रहेगा तो वो ज्यादा देर तक जी नहीं पायेगा| अंकित जो की पंकज का दोस्त था इसलिए उसने अपने दोस्त को बचाने और उसकी ज़िंदगी में ख़ुशी लाने के लिए क़सम खाता है| अब वो रोज कुछ समय पंकज से मिलने को निकालता था और हमेशा पंकज को समझाता था की प्यार करना कोई गलत नहीं है और सपना से प्यार करके तूने कोई गलती नहीं की पर एक गलती तूने ज़रुर की कि सपना को इसके बारे में बताया नहीं | अगर बता देता तो शायद आज तुझे पता होता कि वो भी तुझसे प्यार करती थी कि नहीं | अगर करती होती तो तुझे आज पता होता के वो कहाँ है| मैं तेरे प्यार को गलत नहीं ठहराता पर यह तेरा प्यार एक तरफ़ा प्यार है ऐसा करने से न तो तुम्हे ख़ुशी मिलेगी और कहीं न कहीं सपना की ज़िंदगी भी खुशहाल नहीं होगी क्योंकि तुम उससे याद करते रहोगे और अनजाने में सही जब कोई किसी को दिल से याद करता रहता है तो कहीं न कहीं जिसे हम याद करते है वो भी बेचैन रहता है इस लिए कहीं न कहीं तू सपना को दुःख दे रहा है जो की तुम्हे नहीं करना चाहिए|

 यह बात अंकित बहुत प्यार से पंकज को समझाता है| अंकित की यह बात सुनकर पंकज एक दम उस की तरफ देखता है और बहुत ध्यान से सोचता है अंकित की यह बात उसके दिल में घर कर जाती है कि उसकी वजह से सपना को तकलीफ हो रही होगी| चाहे अनजाने में ही सही पर वो उसे दुःख दे रहा है| पंकज को बात समझ आ जाती है और वो अंकित को यक़ीन दिलाता है कि अबसे वो सपना को दिल में ज़रुर रखूँगा पर अपनी जिंदगी ख़ुशी-ख़ुशी से जिऊँगा| यह सुन कर अंकित उसको गले से लगा लेता है और कहता है मेरी कोशिश काम आ गयी मेरा दोस्त वापिस मुझे मिल गया|

  अगर आप किसी से प्यार करते हो तो उससे बोल दो मतलब इज़हार कर दो| उससे आपको पता चल जाएगा कि वो भी आपसे प्यार करता है या नहीं और अगर आपका कोई भी मित्र किसी तकलीफ़ में है तो उससे छोड़ने की बजाय उसे प्यार से समझाऐं| आपके इस तरह करने से अगर किसी एक को भी समझ आ जाए तो उसकी ज़िंदगी ग़म से ख़ुशी की ओर चली जाऐगी और जो ज़िंदगी उसे मिली है उसको वो ख़ुशी-ख़ुशी से जी पाऐगा| 

कौन हैं माता

पन्द्रह डाउन गाड़ी के छूटने में दो –एक मिनट की देर थी । हरी बत्ती दी जा चुकी थी और सिगनल डाउन हो चुका था । मुसाफ़िर अपने–अपने डिब्बों में जाकर बैठ चुके थे, जब सहसा दो फटेहाल औरतों में हाथापाई होने लगी । एक औरत दूसरी की गोद में से बच्चा छीनने की कोशिश करने लगी और बच्चेवाली औरत एक हाथ से बच्चे को छाती से चिपकाए दूसरे से उस औरत के साथ जूझती हुई, गाड़ी में चढ़ जाने की कोशिश करने लगी ।

     “छोड़, तुझे मौत खाए, छोड़, गाड़ी छूट रही है… ।”

      “नहीं दूंगी,मर जाऊंगी तो भी नहीं दूंगी….।”  दूसरी ने बच्चे के लिए फिर से झपटते हुए कहा ।

    कुछ देर पहले दोनों औरतें आपस में खड़ी बातें कर रही थीं, अभी दोनों छीना–झपटी करने लगी थीं । आस–पास के लोग देखकर हैरान हुए। तमाशबीन इकट्ठे होने लगे । प्लेटफार्म का बावर्दी हवलदार,जो नल पर पानी पीने के लिए जा रहा था, झगड़ा देखकर, छड़ी हिलाता हुआ आगे बढ़ आया ।

       “क्या बात है? क्या हल्ला मचा रही हो? ” उसने दबदबे के साथ कहा ।

हवलदार को देखकर दोनों औरतें ठिठक गईं । दोनों हांफ रही थीं और जानवरों की तरह एक–दूसरी को घूरे जा रही थीं ।

      दो–एक मुसाफिरों को गाड़ी पर चढ़ते देखकर बच्चेवाली औरत फिर गाड़ी की ओर लपकी,लेकिन दूसरी ने झपटकर उसे पकड़ लिया और उसे खींचती हुई फिर प्लेटफार्म के बीचोंबीच ले आई । लटकते –से अंगोंवाला,काला, दुबला–सा बच्चा औरत के कंधे से लगाकर सो रहा था । औरतों की हथापाई में उसकी पतली लम्बूतरी–सी गर्दन, कभी झटका खाकर एक ओर को लुढ़क जाती, कभी दूसरी ओर को । लेकिन फिर भी उसकी नींद नहीं टूट रही थी ।

        “मत हल्ला करो,क्या बात है?” हवलदार ने छड़ी हिलाते हुए चिल्लाकर कहा और अपनी पतली बेंत की छड़ी दोनों औरतों के बीच खोंसकर उन्हें छुड़ाने की कोशिश करने लगा ।

        जो औरत बच्चा छीनने की कोशिश कर रही थी, उसने अपनी बड़ी–बड़ी कातर आंखों से हवलदार की ओर देखा और तड़पकर बोली,  “मेरा बच्चा लिए जा रही है,नहीं दूंगी मैं बच्चा….।” और फिर एक बार वह बच्चा छीनने के लिए लपकी।

          “गाड़ी छूट रही है नासपिट्टी, छोड़ मुझे !” बच्चेवाली औरत ने चिल्लाकर कहा और फिर गाड़ी के डिब्बे की ओर जाने लगी । हवलदार ने आगे बढ़कर उसका रास्ता रोक लिया ।

           “इसका बच्चा क्यों लिए जा रही है?” हवलदार ने कड़ककर कहा ।

           “इसका कहां है!  बच्चा मेरा है!”

      “वह कहती है मेरा है, बोलो किसका  बच्चा है?”

       “मेरा है” दूसरी छोटी उम्र की औरत बोली और कहते ही रो पड़ी । रूखे अस्त–व्यस्त बालों के बीच उसका चेहरा तमतमा रहा था, लेकिन आंखों में अब भी डर समाया हुआ था । बदहवास और व्याकुल वह फिर बच्चे की ओर बढ़ी ।

       हवलदार जल्दी–से जल्दी झगड़ा निबटाना चाहता था । बच्चेवाली औरत से बोला, “बच्चा इसके हवाले कर दो।”

      “क्यों दे दूं,बच्चा मेरा है…..।”

      “तेरे पेट से पैदा हुआ था?”

      बच्चेवाली औरत चुप हो गई और घूर–घूरकर दूसरी औरत को देखने लगी ।

      “बोल तेरे पेट से पैदा हुआ था?” हवलदार ने फिर गुस्से से पूछा ।

      “ पेट से पैदा नहीं हुआ तो क्या, दूध तो मैंने पिलाया है । पिछले सात महीने से पिला रही हूं।”

      “दूध पिलाया है तो इससे बच्चा तेरा हो गया? बच्चे को ज़बरदस्ती लिए जा रही है?”

      “ज़बरदस्ती क्यों ले जाऊंगी, मेरे अपने बच्चे सलामत रहें । इसी से पूछ लो, डायन सामने खड़ी है ।” फिर दूसरी औरत को मुखातिब करके बोलीं, “कलमुंही बोलती क्यों नहीं? मैं तेरे से छीन के ले जा रही हूं? हवलदार जी, इसने खुद बच्चे को मेरी गोद में डाला है । यह तो इसे जानकर घूरे पर फेंकने जा रही थी, मैंने कहा कि ला मुझे दे दे, मैं इसे पाल लूंगी । तब से मैं इसे पाल रही हूं । यह मुझे यहां छोड़ने आई थी । यहां आकर मुकर गई ।”

       हवलदार दूसरी औरत की ओर मुड़ा, “ तू ने इसे खुद दिया था, बच्चा? ”

 युवा औरत की बड़ी–बड़ी उद्भ्रान्त आंखें कुछ देर तक दूसरी औरत की ओर देखती रहीं, फिर झुक गई ।

      “दिया था, पर बच्चा मेरा है, मैं क्यों दूं, मैं नहीं दूंगी ।”

और निस्सहाय–सी फिर दूसरी औरत की ओर देखने लगी ।पहले जो आंसू आंखों में फूट पड़े थे, घबराहट के कारण फौरन ही सूख गए ।

     “तू ने दिया था तो अब क्यों वापस लेना चाहती है?”

कतार नेत्र फिर एक बार ऊपर को उठे और उसका सारा बदन कांप गया ।

     “यह इसे परदेश लिए जा रही है…..।” और कहते–कहते वह फिर रो पड़ी ।

     “मैं सदा तेरे पास पड़ी रहूं?” बच्चेवाली औरत बांहें पसार–पसार कर आस–पास के लोगों को सुनाती हुई बोलने लगी, “मेरे डेरेवाले सभी लोग चले गए हैं । यह मुझे छोड़ती नहीं थी ।कहती थी दस दिन और रुक जा, फिर चली जाना । पांच दिन और रुक जा, चली जाना । करते–करते महीना हो गया । मैं यहां कैसे पड़ी रहूं? आज गाड़ी चलने लगी को कलमुंही मुकर गई है ।”

      “यह तेरे रिश्ते की है?” हवलदार ने पूछा ।

   “रिश्ते की क्यों होगी जी, यह काठियावाड़ की है, हम बनजारे हैं ।”

   “तू गाड़ी में कहां जा रही है?”

   “फिरोजपूर, जी।”

   “वहां क्या है?”

    “हम बनजारे हैं, हवलदारजी, पहले हमारे लोगों ने यहां ज़मीन ली थी, पूरे दो साल हलवाही की है । अब हमें फिरोज़पूर में ज़मीन मिली है । हमारे सभी लोग चले गये हैं, पर यह मुझे छोड़ती नहीं थी ।”

हवलदार दुविधा में पड़ गया । एक ने जानकर फेंक दिया, दूसरी ने दूध पिलाकर बड़ा किया । बच्चा किसका हुआ ?

     “तेरा घर–घाट कोई नहीं है, जो अपना बच्चा इसे दे दिया? तू रहती कहां है?”  हवलदार ने बच्चे की मां से पूछा ।

       “यह कहां रहेगी जी, पुल के पास जो फूंस के झोंपड़े हैं, यह वहीं पर रहती है । हम वहीं पर रहते थे । यह मेरी पड़ोसिन है जी, मजूरी करती है । इसकी तो नाल भी मैंने काटी थी । ” बच्चे की मां उद्भ्रान्त –सी अपने बच्चे की ओर देखे जा रही थी । लगता जैसे वह कुछ भी सुन नहीं रही है ।

        “इसका घरवाला कहां है?”…..

         “इसका घरवाला कोई नहीं जी । यह तो मरदों के पीछे भागती है, कोई इसे बसाता नहीं।

इसका घरबार होता तो यह बच्चे क जनकर फेंकने क्यों जाती?”

        इतने में गार्ड ने सीटी दी ।

        भीड़ में से छंटकर लोग अपने–अपने डिब्बों की ओर जाने लगे । बनजारन भी डिब्बे की ओर घूमी । बच्चे की मां ने आगे बढ़कर उसके पांव पकड़ लिए।

         “मत जा, मत ले जा मेरे बच्चे को, मत ले जा !”

        कुछेक लोगों को तरस आया । हवलदार ने दृढ़ता से आगे बढ़कर बनजारन से कहा,  “बच्चा वापस दे दे । अगर मां बच्चा नहीं देना चाहती तो तू उसे नहीं ले जा सकती ।”

       हवलदार की आवाज़ में दृढ़ता थी ।बनजारन को इस निर्णय की आशा नहीं थी । वह छटपटा गई ।  “मैं क्यों दे दूं जी, अपने बच्चे को भी कोई देता है? किसको दे दूं? इसका घर है, न घाट……”

         “गाड़ी छूटनेवाली है, जल्दी करो, बच्चा मां के हवाले करो वरना हवालत में दे दूंगा । ” हवलदार ने अब की बार कड़ककर कहा ।

          औरत घबरा गई और किंकर्तव्यविमूढ़–सी आसपास खड़े लोगों की ओर देखने लगी । फिर अपनी साथिन की ओर देखते हुए चिल्लाकर बोली,  “हरामज़ादी ! कुतिया ! यहां आकर मुकर गई । ले बेगैरत, ले संभाल, फिर कहना दूध पिलाने को, ज़हर पिलाऊंगी, इसे भी और तुझे भी । सात महीने तक अपने बच्चे का पेट काटकर इसे दूध पिलाया है…..।” और झटक कर बच्चा उसके हाथों में दे दिया और फूट–फूटकर रोने लगी ।

  अजीब तमाशा था । दोनों औरतें रोये जा रही थीं। दोनों एक–दूसरी की दुश्मन, दोनों एक ही बच्चे की माताएं । बेघर लोगों को न हँसने की तमीज़ होती है,न रोने की । और कलह का कारण, दुबला–पतला, पित्त का मारा बच्चा, अब भी मुट्ठियां भींचे सो रहा था ।

          बनजारन गालियां बकती, रोती, बड़बड़ाती गाड़ी में चढ़ गई ।

 “तुम्हें तुम्हारा बच्चा मिल गया है । यहां से चली जाओ फौरन…..”

हवालदार ने सोये बच्चे की पीठ पर छड़ी की नोंक रखते हुए , धमकाकर कहा,  “फौरन यहां से चली जाओ !”

       बच्चे को छाती से चिपकाए, मां पीछे हट गयी । भीड़ बिखर गई । डिब्बे के दरवाज़े में खड़ी बनजारन अभी भी चिल्लाए जा रही थी,  “कंजरी, हरामज़ादी, तू ने इसे जनते ही क्यों नहीं मार डाला? जब भी मार डालेगी, तभी मेरे दिल को चैन मिलेगा, नासपिट्टी…!”

        बच्चे ने गोद पहचान रखी थी या तो इस कारण रहा हो या हवालदार के बेंत की नोक लगने के कारण, बच्चा जाग गया और अपनी नन्हीं–नन्हीं मुट्ठियों से पहले तो अपनी नाक  पीसने लगा, फिर आंखें और थोड़ी देर के बाद अपनी मुट्ठी मुंह में ले जाकर उसे चूसने लगा । औरत अभी भी उद्भ्रांत–सी पीछे हट गई और प्लेटफ़ार्म की दीवार के साथ जा खड़ी हुई ।

       बच्चा दूध के धोखे में अपनी मुट्ठी चूसता रहा, पर दूध न मिलता देख बिलकुल जग गया और दोनों टांगें ज़ोर–ज़ोर से पटककर रोने लगा । मां ने उसे दाएं कन्धे से हटाकर बाएं कन्धे के साथ सटा लिया । लेकिन बच्चा और भी ज़ोर–ज़ोर से रोने लगा ।

       मां परेशान हो उठी । कभी बच्चे को एक करवट उठाती, कभी दूसरी, कभी दाएं कन्धे पर उसका सिर रखती, कभी बाएं पर ।

      बच्चे का रोना सुनकर डिब्बे के दरवाज़े में खड़ी बनजारन फिर चिल्लाने लगी,  “मार डाल, तू इसे मार डाल ! नासपिट्टी, इसे ज़हर क्यों नहीं दे देती! दोपहर से इसके मुंह में दूध की बूंद नहीं गई। बच्चा रोएगा नहीं?”

       हवालदार छड़ी झुलाता वहां से जा चुका था । दो–एक कुलियों को छोड़कर  डिब्बे  के सामने कोई नहीं था । दूर, पीछे की ओर, नाली वर्दीवाला गार्ड हरी झणंडी दिखा रहा था ।

       गाड़ी ने सीटी दी और चलने को हुई ।

       बच्चा रोए जा रहा था । मां ने अपने फटे हुए कुरते की जेब में से मूंगफली के कुछेक दाने निकाले और बच्चे के मुंह में ठूंसने लगी ।

        “नासपिट्टी, यह क्या उसके मुंह में डाल रही है? मेरे बच्चे को मार डालेगी । कसाइन, कंजरी……!”

         और घूमकर पहले एक छोटा–सा टीन का बक्सा और फिर छोटी–सी गठरी प्लेटफार्म पर फेंकी और बड़बड़ाती, गालियां बकती हुई गाड़ी पर से उतर आई ।  “हरामज़ादी, मेरी गाड़ी छुड़ा दी । मौत खाए तुझे! नासपिट्टी……!”

         गाड़ी निकल गई । एक–एक करके कुली स्टेशन के बाहर चले गए । प्लेटफार्म पर मौन छा गया । हवालदार अपनी गश्त पर दूर प्लेटफार्म के दूसरे सिरे तक पहुंच चुका था, लेकिन जब छड़ी झुलाता हुआ वह वापस लौटा, तो प्लेटफार्म के एक कोने में दीवार के साथ सटकर वही दोनों औरतें बैठी थीं । बनजारन अपनी गोद में बच्चे को लिटाए, उसे अपने आंचल से ढके, दूध पिला रही थी और पास बैठ बच्चे की मां धीरे–धीरे अपने लाड़ले के बाल सहला रही थी ।

एक सच्ची प्रेम कथा

                            ​एक सच्ची प्रेम कथा

वह एक गरीब लड़की थी। उसके पिता किसी दुकान पर मजदूरी करते थे और मां घरों में चौका बरतन। वह अपने मां-बाप की इकलौती लड़की थी, इसलिए उन्होंने उसे बड़े लाड प्यार से पाला था। वे चाहते थे कि वह पढ़ लिख कर बड़ी आदमी बने, जिससे उसे गरीबी में दिन न गुजारने पड़ें।जब

 उसने गांव के स्कूल से 10वीं का इक्ज़ाम पास किया, तो बहुत खुश हुई। मां-बात ने किसी तरह पैसोें का जुगाड़ करके गांव से 8 किमी0 दूर के कस्बे में उसका इंटर कॉलेज में नाम लिखा दिया। वह साइकिल से स्कूल जाने लगी। इस तरह से उसकी जिंदगी आगे बढ़ने लगी।लेकिन

 एक दिन उसकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया। स्कूल से निकलते वक्त एक लड़का बाइक लेकर उसके पास आया और धीरे से बोला- अगर आप बुरा न मानें तो मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं। लड़की

 उस लड़के को अक्सर रास्ते में देखा करती थी। जब भी वह स्कूल आती और स्कूल से जाती, वह लड़का सडक के किनारे खड़ा उसे निहारा करता। पहले शुरू में तो उसे यह सब अच्छा नहीं लगा, लेकिन धीरे-धीरे वह भी उसे अच्छा लगने लगा था। इसलिए जब उस लड़के ने कहने की अनुमति मांगी, तो उसने धीरे से सिर हिलाकर अनुमति दे दी।उस

 लड़के ने अपनी शर्ट की जेब से एक गुलाब की कली निकाल कर उसके हाथ में रख दी और उसकी मुटठी बंद करते हुए बोला- ”मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। उठते-बैठते, सोते जगते हर समय बस तुम्हारे बारे में सोचा करता हूं। मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता है….”

लड़का

 और भी बहुत कुछ कहना चाहता था, पर लड़की ने धीरे से उसके होठों पर अपना हाथ रख कर उसके प्यार का इकरार कर लिया। इस तरह उन दोनों में बात-चीत की शुरूआत हो गयी। लड़का रोज उसके लिए कोई न कोई गिफ्ट लाता और उसके लिए जीने मरने की कसमें खाता। उसकी बातें सुनकर लड़की दीवानी हो जाती और ख्वाबों की दुनिया में खो जाती।एक

 दिन वह लड़का उस लड़की को अपनी बाइक पर घुमाने ले गया। दोनों लोग नदी के किनारे पहुंचें और घास पर बैठ कर बातें करने लगे। लेकिन लड़के की मंशा तो कुछ और थी। लेकिन प्यार में अंधी हो चुकी वह लड़की उसकी मंशा समझ नहीं पाई और उसने अपने आप को लड़के के हवाले कर दिया। दोनों लोग एक दूसरे के प्यार में ऐसे खोए कि दो जिस्म एक जान हो गये।लेकिन

 न जाने कहां से वहां पर तीन लड़के आ गये। उन्हें देखकर लड़की हक्का-बक्का रह गयी और अपने कपड़े सही करने लगी। यह देख कर एक लड़का उसका हाथ पकड़ता हुआ बोला- इतनी भी क्या जल्दी है मेरी रानी, हम भी तो तुम्हारे दिवाने हैं। थोड़ा हमारा भी तो मनोरंजन कर दो।लडकी

 ने अपने प्रेमी से मदद मांगी। मगर वह यह सब देखकर हंसता रहा। यह देख कर लड़की का हृदय धक्क से रह गया। यानी कि यह सब इसकी चाल थी?आगे

 लड़की कुछ सोच ही नहीं पाई। क्योंकि वे तीनों लड़के उसके शरीर पर भूखे भेडिए की तरह टूट पड़े और अपनी हवस की आग बुझाते रहे। वह लड़की मदद के लिए चिल्लाती रही और वे उसे नोचते-घसोटते चले। लगभग

 एक घंटे के बाद लड़की को होश आया, तो उसने अपने आपको नंग-धडंग पाया। वे तीनों लड़के और उसका प्रेमी वहां से जा चुके थे। लड़की की आंखों के आगे अंधेरा छा रहा था। उसकी दुनिया अंधेरे से भर चुकी थी। उसे अपना जीवन समाप्त होता हुआ लग रहा था। वह

 सोचती रही कि क्यों उसने उस बेवफा लड़के की बातों पर ऐतबार किया। क्यों मैं उसके साथ यहां पर आई। अब मैं क्या मुंह लेकर अपने घर जाऊंगी। अपने मां-बाप को क्या बताऊंगी। मेरा ये हाल देखकर वे तो जीतेजी मर जाएंगे। लड़की

 का गला बुरी तरह से सूख रहा था। वह किस तरह घि‍सटती हुई नदी के किनारे पहुंची। नदी का पानी कल-कल करता हुआ तेजी से बह रहा था। लड़की ने एक बार फिर अपने मजबूर मां-बाप, अपने बेवफा प्रेमी के बारे में सोचा और फिर नदी में छलांग लगा दी। अगले

 ही पल वह नदी में डूबने उतराने लगी। लेकिन अब न तो वह किसी को अपनी जान बचाने के लिए पुकार रही थी और न ही बचने के लिए संघर्ष कर रही थी। उसका मन ठहरे हुए जल की शांत था। वह भी अपने बेवफा प्रेमी के बारे में सोच रही थी कि क्यों उसने उसकी बातों पर इस तरह से ऐतबार कर लिया, क्यों मैंने उससे अंधा प्यार किया, क्यों मैंने उसके प्यार को जरूरत नहीं समझी? अगर मैं ऐसा कर पाती, तो शायद….. और फिर वह नदी की गहराई में डूबती चली गयी। 

दोस्तो किसी से प्यार करना, किसी पर ऐतबार करना बुरा नहीं है, लेकिन जज्बातों को पहचानने की क्षमता भी रखिए। किसी को अपना तन-मन सौंपने से पहले उसके परिणामों के बारे में भी जरूर सोचिए। नहीं तो आप भी धोखा खा सकते हैं, आप भी ठगे जा सकते हैं।