सपना

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आज कॉलेज का आख़िरी दिन है आज के बाद लगभग सभी लोग अलग हो जाएंगे पता नही फिर कब मिलना हो इसलिए सभी इस आखिरी दिन को यादगार बनाने की कोशिश में लगे हुए है। हालाकि मेरी पढाई में कोई रूचि नही थी इसलिए  मैं बीए कर रही थी मुझे तो बस शादी से बचना था इसलिए पढाई का बहाना सबसे अच्छा है पढाई के नाम पर तीन साल के लिए शादी से छुट्टी मिल गयी। कॉलेज ख़त्म होने से पहले ही पापा और जीजाजी ने मेरे लिए लड़का पसंद कर के रखा है जैसे ही कॉलेज खत्म मेरी शादी होने वाली है।शादी को लेकर हर किसी के सपने होंते है सभी की तरह मैंने भी कुछ सपने सजा रखे है। मेरे सपनो का राजकुमार कैसा होना चाहिए मैंने पूरी लिस्ट बना रखी है। वो मुझसे लंबा होना चाहिए मेरे से ज्यादा पढ़ा लिखा और दिखने में भी अच्छा होना चाहिए और सबसे जरुरी चीज व्यक्त्वि और सौभाव का अच्छा होना चाहिए। शराब और किसी भी तरह का नशा नही करने वाला होना चाहिए ये चीज सबसे ज्यादा जरुरी हैं क्योंकि मैंने नशे से कितने ही घरों को बर्बाद होते हुए देखा है। नशा समाज को खोखला कर देता है किसी दीमक की तरह

कॉलेज खत्म होने के बाद जब मै घर पहुँची तो मेरी मां बाहर के दरवाजे पे खड़ी थी मानों वो मेरा इन्तजार कर रही हो। मुझे देखते ही मेरी माँ के चेहरे पे एक प्यारी सी मुस्कान आ जाती इस मुस्कान से मेरी माँ और भी सुन्दर लगने लगती है। माँ ने मेरे लिए खाना निकाला और मै हाथ मुँह धो कर खाना खाने को बैठी आज मेरे पसंद की सब्जी बनी थी इसलिए मै जल्दी से शूरु हो गयी, माँ ने कॉलेज के बारे में पूछा और कहा कल तुझे देखने आ रहे है मेरा मुँह में निवाला जाते जाते रुक गया ये सुनते ही की कल मुझे देखने आ रहे हैं। मैंने माँ से कहा इतनी जल्दी क्या है माँ ने कहा ये मेरा फैसला नही तेरे पिताजी का है जो कहना है उन्ही से कहना मुझे बताने को कहा मैंने बता दिया कल कही जाना नही कल 10 बजे ही वो लोग आ जायेंगे फिर 2 से 3 बजे तक निकल जाएंगे। तेरे पिताजी बोल रहे थी की लड़का रेलवे में इंजीनियर है। इससे अच्छा रिश्ता कहाँ मिलेगा। अगर बात बन गयी तो तेरे तो किस्मत ही खुल जाने है। राज करेगी मेरी बेटी सबसे अच्छी बात ये है कि तेरी सास नही है और वो इकलौता लड़का है एक लड़की भी है उनकी उसकी भी शादी हो चुकी है।


बज चुके है घड़ी में मेरे दिल की धड़कन तेज हो रही है मुझे बहुत घबड़ाहट हो रही है पता नही लड़का कैसा होगा यही सोच सोच के मेरा दिमाग खराब हो रहा है मैं अभी तक तैयार भी नही हुई इस पर माँ मेरे पर चिल्ला रही है । मुझे उनके सामने जाना होगा मुझे बहुत डर लग रहा है पता नही क्या होगा मेरा कही कुछ मेरे से गलत हो गया तो पिताजी मुझे जान से मर देगे। जैसे तैसे मै तैयार हो गयी और उनके आने का इंतजार कर रही थी तभी माँ आयी और बोली ये क्या हाल बना रखा है ऐसे जायेगी उनके सामने । मैंने माँ से कहा क्या हुआ अब मै तो तैयार होकर बैठी हुई हूँ इसपर माँ ने कहा ये कपड़े नही चलेगे साड़ी पहन लो मैंने इन्कार कर दिया माँ ने जबदस्ती मुझे साड़ी पहना दी। साड़ी मै थोड़ी लंबी लग रही थी और पहले से ज्यादा सुन्दर भी दिख रही थी।इतने में पिताजी की आवाज आई की मेहमान आ गए चाय पानी ले आओ। ये सुनते ही मेरा दिल और भी जोरो से धड़कने लगा।


लड़के वाले बैठे थे माँ और पिताजी उनसे बाते कर रहे थे इतने में माँ उठी और मेरे कमरे की ओर आने लगी मै समझ गयी की मेरा बुलावा आया है। मै माँ के साथ उनके सामने गयी मै सबको प्रणाम किया और फिर माँ ने मुझे लड़के के सामने वाली कुर्सी पर बिठा दिया। मै अंदर से बहुत घबराई हुई थी फिर भी जैसे तैसे अपने आप को संभाला और शांति से बैठी रही । मैंने धीरे से नजरे बचाते हुए लड़के को ठीक से देखा लड़का वैसा ही था जैसा मैंने सोच रखा था मैं मन ही मन बहुत खुश हुई और हल्की सी मुस्कुराई। उनके चेहरे देख के ये लग रहा थी की मै उन्हें पसंद आ गयी । उनके पूरे बातचीत के दौरान शांति से बैठी रही उन्होंने जो पूछा बस उसका ही जबाब दिया बस फिर खामोश बैठी रही। वो लोग रिश्ता पक्का कर के चले गए वो मुझे रिश्ते की पहली भेट भी दे गए जिसमे एक सेट साड़ी थी एक चाँदी की आगूठी और चांदी की चैन और कुछ फल थे। मै खुश थी क्योंकि लड़का मेरे पसंद का था। मैंने आगूठी और चैन को पहन लिया। शाम को उनलोगों का फ़ोन आया की 15 दिनों के बाद की शादी का मुहर्त निकाला है पिताजी ने भी हाँ कह दिया। मेरे पिताजी मेरी शादी तय होने से बहुत खुश थे ।


शादी का दिन कब आ गया मुझे खुद ही पता नही चला मै भी पूरी तरह से तैयार बैठी थी मेरी सहेलिया मेरी चुटकी ले रही थी और हँसी मजाक चल रहा था मैं भी बहुत खुश थी तभी किसी ने आवाज दी की बारात आ गयी हम सब बारात देखने के लिए बालकनी में आ गए दूल्हा घोड़े पे आया था उसने शेरवानी पहना हुआ था वो बहुत अच्छा लग रहा था। निश्चित मुहर्त पे हमारी शादी हो गयी मै बिदा होकर अपने ससुराल को जाने वाली थी सभी लोग रो रहे थे साथ में मैं भी रो रही थी मेरे तो आँशु रुक ही नही रहे थे।सब से बिदा ले के मैं चली गयी।


ससुराल पहुँची तो तो पता चला की मेरा नया घर बहुत बड़ा था और काफी आलीशान भी लग रहा था कुछ औरतो ने मेरी आरती उतारी और सारी रस्मे की फिर मुझे अन्दर ले जाया गया घर अंदर से भी काफी सुन्दर था। रात हो गयी छोटे मोटे रस्मे निभाने में ही मै बहुत थक भी गयी थी । आज हमारी सुहागरात थी हमारे कमरे को सजा दिया गया था। जैसे फिल्मो में दिखाया जाता है, मै थोड़ी सी घबराई हुई थी और अपने पति का इंतजार कर रही थी। इंतजार करते करते काफी समय हो चला और मुझे नींद भी आ रही थी मै जमाही ले रही थी तभी वो अंदर आये वो ऐसे चल रहे हो जैसे कोई शराबी शराब पी के चलता है। वो मेरे पास आ के बैठे, उन्होंने जैसे ही बात करने के लिए अपना मुँह खोला उनके मुंह से शराब की गन्दी बदबू का एहसास होता है । उन्होंने मुझसे पूछा तुम ठीक तो हो खाना वाना खाया की नही,मैंने हाँ में सिर हिलाया वो फिर बोले मुझे माफ़ करना मै शराब नही पीता आज मुझे मेरे दोस्तों ने जबर्दस्ती शराब पिला दिया । 
मैंने उनसे कहा कोई बात नही पर मुझे शराब पीने वाले लोग मुझे पसंद नही है । इसपर उन्होंने मुझसे वादा किया किया कि आगे से कभी शराब नही पिऊँगा। उन्होंने बहुत ज्यादा पी रखी थे उनसे बैठा भी नही जाता मैंने ही उनसे कहा आप सो जाइये आप से ठीक से बैठा भी नही जा रहा और मुझे भी बहुत नींद आ रही है। वो कुछ बोलते बोलते सो गए मैंने उन्हें ठीक किया और मैं भी साथ में ही सो गयी।


सुबह जब आँख खुली तो मैं जल्दी से तैयार होकर सब के लिए नास्ता बनाने को चली गयी। थोड़ी देर के बाद उनकी नींद खुली और उन्होंने मुझे आवाज लगाई उनके सिर में बहुत दर्द हो रहा था इसलिए उन्होंने नीम्बू पानी लाने को कहा साथ में सर दर्द की दवाई भी मै तुरंत ही उन्हें दोनों चीजे ला के दे देती हूँ।वो दवा खा के तैयार होने को चले जाते है। उनको मैंने नाश्ता करके काम पे भेज दिया। क्योंकि मेरी सास नही थी और आज सारे रिश्तेदार भी चले जायेंगे इसलिए मैंने जल्दी से घर को सँभालने की सोची।


ऐसे ही कुछ दिन बीत गए शुरु में सब सही चल रहा था पर अचानक उन्होंने अपना रंग बदला और फिर रोज शराब पी के घर आने लगे ,इस बात को ले कर हम दिनों में रोज कहा सुनी होने लगी । मै उन्हें रोज मना करती की शराब ना पिये और वो फिर भी रोज पी के आते फिर रोज रात को हमारी लड़ाई होती। एक दिन हमारी लड़ाई हो गयी उन्होंने मुझ पे हाथ उठा दिया, मुझे एक झटका सा की आज उन्होंने मुझ पे हाथ उठा दिया यही सोच सोच के मै  पकड़ के रोते जा रही थी और वो दूसरे कमरे में जा के सो गए। मै रात भर रोते रोते बिता दी ।


फिर ये रोज की बात हो गयी वो पी के आते और रोज मुझे मारते पीटते । मैंने ये बात अपने माँ बाप को बताई और वो आये और उन्हें समझा के चले गए। फिर कुछ दिनों के बाद वही सब फिर से चालू हो गया अब तो वो कुछ और ही ज्यादा हिंसक हो गए थे। मेरा जीवन नरक बन गया था, मै बहुत परेशान और दुखी हो चुकी थी अपने जीवन से कभी कभी तो दिल करता की जान दे दूँ ऐसी जिंदगी से तो मर जाना ही बेहतर है। एक दिन तो बात इतनी ज्यादा बढ़ गयी की उसने मेरा सिर दिवार पे पटक दिया जिससे मेरा सिर फट गया और खून बहने लगा और मेरा पूरा चेहरा खून से लाल हो गया चोट इतनी जोर से लगी की मुझे चक्कर आ गया और मै बेहोश हो के गिर गयी। रात भर मै ऐसे ही पड़ी रही जब आँखे खुली तो चोट के कारण सिर में बहुत दर्द हो रहा था और जमीन पे बहुत सा खून फैला हुआ था । मैं जैसे तैसे करके उठी और बैठी फिर मैंने अपने माँ को फ़ोन किया और सब बात बता दी।


मेरी माँ आयी और मुझे अपने साथ ले गयी और मै फिर कभी उस घर में नही गयी अब मैंने भी नौकरी पकड़ ली है । अब मै एक स्कूल में पढ़ाती हूँ । लेकिन दुःख इस बात का है कि मेरा सपना टूट गया और ऐसे टुटा की मेरा सुहाना सपना एक दर्दनाक और खौफनाक सपने में बदल गया।

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